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राजस्थान इतिहास के स्रोत [Sources of rajasthan history]-01 || सिक्के

 राजस्थान इतिहास के स्रोत [Sources of rajasthan history]-01

1. राजस्थान इतिहास को जानने के स्त्रोतः- इतिहास का शाब्दिक अर्थ- ऐसा निश्चित रूप से हुआ है। इतिहास के जनक यूनान के हेरोडोटस को माना जाता हैं लगभग 2500 वर्ष पूर्व उन्होने " हिस्टोरिका" नामक ग्रन्थ की रचना की । इस ग्रन्थ में उन्होने भारत का उल्लेख भी किया हैं।

2. भारतीय इतिहास के जनक महाभारत के लेखक वेद व्यास माने जाते है। महाभारत का प्राचीन नाम "जय सहिता" था।
3. राजस्थान इतिहास के जनक कर्नल जेम्सहाडॅ कहे जाते है। वे 1818 से 1821 के मध्य मेवाड़ (उदयपुर) प्राप्त के पोलिटिकल एजेन्ट थे उन्होने घोडे पर धूम-धूम कर राजस्थान के इतिहास को लिखा।
4. अतः कर्नल टाॅड को "घोडे वाले बाबा" कहा जाता है। इन्होने "एनाल्स एण्ड एंटीक्वीटीज आॅफ राजस्थान" नामक पुस्तकालय का लन्दन में 1829 में प्रकाशन करवाया।
5. गोराी शंकर हिराचन्द ओझा (जी.एच. ओझा) ने इसका सर्वप्रथम हिन्दी में अनुवाद करवाया। इस पुस्तक का दूसरा नाम "सैटर्ल एण्ड वेस्टर्न राजपूत स्टेट आॅफ इंडिया" है।
6. कर्नल जेम्स टाॅड की एक अनय पुस्तक "टेªवल इन वेस्र्टन इण्डिया" का इसकी मृत्यु के पश्चात 1837 में इनकी पत्नी ने प्रकाशन करवाया।

सिक्के

1. सिक्को के अध्ययन न्यूमिसमेटिक्स कहा जाता है। भारतीय इतिहास सिंधुघाटी सभ्यता और वैदिक सभ्यता में सिक्को का व्यापार वस्तुविनियम पर आधारित था। भारत में सर्वप्रथम सिक्को का प्रचलन 2500 वर्ष पूर्व हुआ ये मुद्राऐं खुदाई के दोरान खण्डित अवस्था में प्राप्त हुई है। अतः इन्हें आहत मुद्राएं कहा जाता है। इन पर विशेष चिन्ह बने हुए है। अतः इन्हें पंचमार्क सिक्के भी कहते है। ये मुद्राऐं वर्गाकार, आयाताकार व वृत्ताकार रूप में है। कोटिल्य के अर्थशास्त्र में इन्हें पण/कार्षापण की संज्ञा दी गई ये अधिकांशतः चांदी धातु के थे।
2. राजस्थान के चैहान वंश ने राज्य में सर्वप्रथम अपनी मुद्राऐं जारी की। उनमें "द्रम्म" और "विशोपक" तांबे के "रूपक" चांदी के "दिनार" सोने का सिक्का था।
3. मध्य युग में अकबर ने राजस्थान में "सिक्का ए एलची" जारी किया। अकबर के आमेर से अच्छे संबंध थें अतः वहां सर्व प्रथम टकसाल खोलने की अनुमती प्रदान की गई।

राजस्थान की रियासतों ने निम्नलिखित सिक्के जारी किये


1. रियासत -- वंश -- सिक्के
2. आमेर -- कछवाह -- झाडशाही
3. मेवाड -- सिसोदिया -- चांदौडी (स्वर्ण)
4. मारवाड -- राठौड़ -- विजयशाही
5. मारवाड (गजसिंह) राठौड -- राठौड़ -- गदिया/फदिया
6. अंग्रेजों के समय जारी मुद्राओं में कलदार (चांदी) सर्वाधिक प्रसिद्ध है।


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