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हिन्दी भाषा एवं व्याकरण महत्वपूर्ण नोट्स

हिन्दी भाषा एवं व्याकरण



बोली-

     सीमित क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा सामान्यतः बोली कहलाती है। बोली का मानक व्याकरण व मानक साहित्य नहीं होता है।

उदाहरणार्थ - बघेली, छत्तीसगढ़ी, मारवाड़ी आदि।



विभाषा-

    विभाषा का क्षेत्र बोली की अपेक्षा बड़ा होता है। विभाषा का आधा-अधूरा व्याकरण व लोक साहित्य होता है। 

उदाहरणार्थ - ब्रज,अवधी, बुन्देली आदि।



भाषा-


अभिव्यक्ति के माध्यम, अर्थात् - विचारों के आदान-प्रदान के साधन को भाषा कहते हैं।

भाषा विस्तृत क्षेत्र में बोली जाती है। भाषा का मानक व्याकरण एवं मानक साहित्य होता है। 

भाषा के मुख्यत: दो रूप होते हैं -


मौखिक भाषा एवं लिखित भाषा।


इस प्रकार बोली का विकास विभाषा में तथा विभाषा का विकास भाषा में होता है।


बोली          विभाषा          भाषा



- राष्ट्रभाषा

       राष्ट्रभाषा का शाब्दिक अर्थ है समस्त राष्ट्र में प्रयुक्त होने वाली भाषा, अर्थात् - जो भाषा समस्त राष्ट्र में जन-जन के
विचार-विनिमय का माध्यम हो, वह राष्ट्रभाषा कहलाती है। भारत की राष्ट्रभाषा "हिन्दी' (खड़ी बोली) है।


 राजभाषा-

         राजभाषा का शाब्दिक अर्थ है - राज-काज की भाषा, अर्थात् - जो भाषा देश के राजकीय कार्यों के लिए प्रयुक्त होती है, वह
राजभाषा कहलाती है। राजभाषा को संवैधानिक मान्यता प्राप्त होती है। भारत की राजभाषा हिन्दी' (खड़ी बोली) है।


हिन्दी भाषा का विकास

- हिन्दी का विकास क्रम
हिन्दी की आदि जननी संस्कृत है। हिन्दी का विकास क्रम इस प्रको
संस्कृत - पाली
- प्राकृत
अपभ्रंश
अवहट्ट → प्राचीन हिन्दी


भाषा परिवार

      -विश्व में लगभग 3000 भाषाएं बोली जाती हैं, जिन्हें 13 भाषा परिवारों में वर्गीकृत किया गया है। भारत में बोली जाने वाली
विभिन्न भाषाएं 4 भाषा परिवार - भारोपीय, द्रविड़, आस्ट्रिक एवं चीनी-तिब्बती से संबंधित हैं। भारत में बोलने वालों के प्रतिशत के
आधार पर भारोपीय परिवार सबसे बड़ा भाषा परिवार है। हिन्दी भारोपीय परिवार की भाषा है। आकृति या रूप के आधार पर हिन्दी
वियोगात्मक या विश्लिष्ट भाषा है।


हिन्दी का नामकरण-

         हिन्दी मूलत: फारसी भाषा का शब्द है। प्राचीनकाल में भारत आने वाले ईरानियों ने सिन्धू नदी एवं इस क्षेत्र के निवासियों की भाषा
सिंधी को क्रमशः हिन्दू नदी एवं हिन्दी कहा। इसका कारण यह था कि फारसी में 'स' को 'ह' एवं 'ध' को 'द' उच्चारित किया जाता
है। इस प्रकार हिन्दी का नामकरण ईरानियों के द्वारा किया गया।






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